वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर (2)
चंद घड़ियाँ येही हैं जो आज़ाद हैं (2)
इनको खोकर मेरे जान-ऐ-जान
उम्र भर न तरसते रहो
आज जाने की जिद न करो
हाय मर जायेंगे , हम तो लुट जायेंगे
ऐसी बातें किया न करो
आज जाने की ज़िद न करो
Wednesday, May 5, 2010
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